कौन थे पहले कांवड़ यात्री ? जानें सावन में कांवड़ यात्रा का महत्व, इतिहास और उससे मिलने वाला पुण्य

सावन मास के दौरान कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। यह यात्रा भगवान शिव के भक्तों के लिए एक पवित्र और धार्मिक यात्रा है। कांवड़ यात्रा का उद्देश्य गंगा जल को लाकर शिवलिंग पर अर्पित करना है। इसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त अपने शरीर को शुद्ध रखने के लिए व्रत और उपवास का पालन करते हैं। यह यात्रा न केवल शारीरिक तपस्या का प्रतीक है, बल्कि मानसिक और आत्मिक शुद्धिकरण का भी माध्यम है।

2024 में कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन? जानें शुभ मुहूर्त , महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ

रक्षाबंधन, जिसे ‘राखी’ के नाम से भी जाना जाता है, भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के प्रतीक का त्योहार है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व 2024 में 19 अगस्त को मनाया जाएगा।

श्रावण मास: भगवान शिव के प्रिय महीने में भूलकर भी न करें तामसिक भोजन, सात्विक भोजन का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

श्रावण मास हिंदुओं के लिए एक पवित्र और महत्वपूर्ण महीना है। यह महीना उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों से भरा होता है, जिसमें रक्षाबंधन, नाग पंचमी, ओणम जैसे त्यौहार शामिल हैं। श्रावण मास में केवल शाकाहारी भोजन करने के पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण होते हैं।

रक्षाबंधन: भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का पर्व

रक्षाबंधन हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे दुनिया भर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के बीच के सुंदर और पवित्र रिश्ते को प्रदर्शित करता है, जिसमें प्रेम, देखभाल और स्नेह की भावना शामिल होती है।

कदम्ब का वृक्ष जिसको लगाने से बनी रहती है पूरे परिवार पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा दृष्टि

कदंब का वृक्ष एक सदाबहार पेड़ है, जो भारत, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Neolamarckia cadamba है। इस वृक्ष के फूल गोल-गोल और सुगंधित होते हैं और पीले रंग के होते हैं। कदंब का वृक्ष धार्मिक, औषधीय और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।

सावन का पहला सोमवार: महादेव की उपासना का पावन पर्व

सावन का महीना हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन महीने में भगवान शिव की उपासना विशेष रूप से की जाती है।

53 वर्षों बाद दो दिवसीय रथ यात्रा के लिए पुरी तैयार: राष्ट्रपति मुर्मू होंगी शामिल

समुद्र तटीय तीर्थ नगरी “पुरी” 53 वर्षों के बाद भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा उत्सव को दो दिवसीय आयोजन के रूप में मनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 7 जुलाई से शुरू होने वाली इस यात्रा को इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी देखने आ रही हैं। राज्य सरकार ने उनके दौरे के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं।

गुप्त नवरात्रि 2024: देवी दुर्गा की विशेष उपासना का पर्व- घट स्थापना और गुप्त नवरात्रि घटस्थापना तथा नवरात्रि में घट कब स्थापित किया जाएगा & नवरात्रि पूजा के नियम

गुप्त नवरात्रि एक प्रमुख नौ दिवसीय पर्व है जो देवी दुर्गा को समर्पित है। इस पर्व में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, उपवास और पवित्र पाठ किए जाते हैं, जो आध्यात्मिक शुद्धि, दिव्य आशीर्वाद और इच्छाशक्ति की वृद्धि के लिए माने जाते हैं।

निर्जला एकादशी 2024: व्रत, पूजा विधि और दान का महत्व – Nirjala Ekadashi 2024 date and time

निर्जला एकादशी सनातन परंपरा में एक महत्वपूर्ण एकादशी है, जो भगवान विष्णु की उपासना को समर्पित है। इसे ‘ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। ‘निर्जला’ का अर्थ है ‘बिना जल के’। इस दिन भक्त बिना खाना और पानी ग्रहण किए उपवास करते हैं। माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत सभी पापों का नाश करता है और मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इसे भीमसेनी एकादशी -(Bhimseni Ekadashi) के नाम से भी जाना जाता है।

गंगा दशहरा: जीवन और उमंग से जुड़ा महापर्व- When is Ganga Dussehra Date 2024

गंगा दशहरा हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि सामान्यतः मई या जून माह में पड़ती है। 2024 में गंगा दशहरा 16 जून को पड़ेगा। इसे गंगावतरण (gangavataran) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘गंगा का अवतरण’। इस साल गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी एक ही दिन मनाए जाएंगे।