सांवरिया सेठ मंदिर: कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जाइये और धनवान बनकर लौटिए

यहाँ की मान्यता है कि यहाँ पर जितना दान करेंगे ,उसका कई गुना फलित होकर मिलता है। इसीलिए यहां देशभर से व्यापारी और श्रद्धालु आते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के समय मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और यहां भव्य आयोजन होते हैं, जिनमें भाग लेकर भक्त धन्य महसूस करते हैं।

लड्डू गोपाल की मूर्ति किस दिशा में स्थापित करने से प्रसन्न होते हैं कान्हा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में किसी भी देवी-देवता की मूर्ति की स्थापना सही दिशा में होनी चाहिए ताकि उनकी कृपा सदैव बनी रहे।

18 सितंबर को 2024 का दूसरा चंद्र ग्रहण: जानें सूतक काल और राशियों पर प्रभाव

जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा पूरी तरह से एक सीध में नहीं होते हैं, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा के एक हिस्से पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ढकता है।

कालसर्प दोष दूर करने के लिए नाग पंचमी को करें इस मंत्र का पूजन ,दूर होंगी जीवन की सारी बाधाएं

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सर्प धन, समृद्धि और स्वास्थ्य के प्रतीक माने जाते हैं। नाग पंचमी के दिन सर्पों की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसके अलावा, यह पर्व पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है, क्योंकि सर्पों का संरक्षण महत्वपूर्ण है।

हरियाली तीज: शंकर और पार्वती की पूजा करके प्राप्त करें अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद

हरियाली तीज, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष 2024 में हरियाली तीज, बुधवार 07 अगस्त को मनाई जाएगी।

कृष्ण जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का महापर्व

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मथुरा के कारागार में हुआ था। उनके माता-पिता वासुदेव और देवकी थे, जिन्हें कृष्ण के मामा कंस ने कारागार में बंदी बना रखा था। कंस को देवकी के आठवें पुत्र से अपनी मृत्यु का भय था, इसलिए उसने देवकी की सभी संतानों को मार डाला। लेकिन जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब उनके पिता वासुदेव ने उन्हें यमुना नदी पार कर गोकुल में नंद बाबा और यशोदा माता के पास सुरक्षित पहुंचा दिया।

भगवान शंकर का सही विधि से करें अभिषेक और प्राप्त करें भोलेनाथ की कृपा ,शिवलिंग पूजा विधि: एक विस्तृत मार्गदर्शिका

शिवलिंग की पूजा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र मानी जाती है। यह पूजा भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक प्रमुख माध्यम है। इस लेख में हम शिवलिंग की पूजा विधि को विस्तार से समझेंगे और जानेंगे कि कैसे सही तरीके से पूजा करें ताकि भगवान शिव की कृपा प्राप्त हो सके।

कौन थे पहले कांवड़ यात्री ? जानें सावन में कांवड़ यात्रा का महत्व, इतिहास और उससे मिलने वाला पुण्य

सावन मास के दौरान कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। यह यात्रा भगवान शिव के भक्तों के लिए एक पवित्र और धार्मिक यात्रा है। कांवड़ यात्रा का उद्देश्य गंगा जल को लाकर शिवलिंग पर अर्पित करना है। इसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त अपने शरीर को शुद्ध रखने के लिए व्रत और उपवास का पालन करते हैं। यह यात्रा न केवल शारीरिक तपस्या का प्रतीक है, बल्कि मानसिक और आत्मिक शुद्धिकरण का भी माध्यम है।

2024 में कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन? जानें शुभ मुहूर्त , महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ

रक्षाबंधन, जिसे ‘राखी’ के नाम से भी जाना जाता है, भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के प्रतीक का त्योहार है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व 2024 में 19 अगस्त को मनाया जाएगा।

श्रावण मास: भगवान शिव के प्रिय महीने में भूलकर भी न करें तामसिक भोजन, सात्विक भोजन का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

श्रावण मास हिंदुओं के लिए एक पवित्र और महत्वपूर्ण महीना है। यह महीना उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों से भरा होता है, जिसमें रक्षाबंधन, नाग पंचमी, ओणम जैसे त्यौहार शामिल हैं। श्रावण मास में केवल शाकाहारी भोजन करने के पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण होते हैं।